किस्मत तो वो ही लिखेगी जो तुम चाहते हो

Best Motivational Story In Hindi-दोस्तों हमारी लाइफ में जब भी हमे असफलता मिलती है तो हम कुछ ना कुछ बहाना जरुर बनाते और यहाँ सबसे ज्यादा हम एक ही बात बोलते है की मेरी तो किस्मत ही ख़राब और जो चीज हम चाहते है अगर वो नही मिलती है तो हम सिर्फ किस्मत को दोष देते है की ये तो मेरी किस्मत में ही नही लिखा है
पर दोस्तों कुछ पाने के लिए हमारे लिए किस्मत पर विस्वास करने के अलावा भी और कुछ साधन होते है जिनसे हम किस्मत का लिखा बदल सकते है और वो एक मात्र साधन हमारी मेहनत जिससे हम अपने बंद भाग्य के दरवाजे भी खोल सकते है इसको समझाने से पहले में आपको एक कहानी बताता हु जिससे आपको बेहतर समझ में आजयेगा की भाग्य और किस्मत कब हमारा साथ देते है
एक बार दो राजा थे प्रथम और दितीय इन दोनों राजाओ के बिच कुछ अनबन हो गयी और दोनों राजाओ के बिच युद्ध की स्थिति बन जाती है उसके बाद प्रथम राजा एक ऋषि के पास जाता है और उनसे पूछता है की इस युद में किसकी विजय होगी तो उस ऋषि ने प्रथम राजा से कहा की महाराज इस युद्ध में आपकी ही विजय होगी तो प्रथम राजा खुश हो गया और अपने महल में आगया ! उसके बाद दितीय राजा भी उस ऋषि के पास गया और पूछा की है महात्मा इस युद्ध में किसकी विजय होगी तो ऋषि कहा की इस युद्ध में आपकी पराजय होगी और प्रथम राजा की जीत होगी और आपके भाग्य में तो पराजय लिखी हुयी है उसके बाद दितीय राजा दुखी हो गया और बाद में उसने सोचा की में मेहनत से अपने भाग्य को बदल सकता हु तो उसने अपने सेनिको को युद्ध का विशेष प्रशिक्षण दिया और अपने सेना में और नोजवानो को सामिल किया और युद्ध पुरे जोश के साथ तयारी कर लि लेकिन प्रथम राजा ने युद्ध की कोई तयारी नही की क्योकि उसको पता था की उसके भाग्य में जीतना लिखा था तो उसको कोण हरा सकता है तो उसने कोई तयारी नही की और जब युद्ध शुरू हुवा तो वो राजा अपनी नार्मल सेना लेकर युद्ध में आगया जबकि दितीय राजा अपनी पूरी सेना को लेके आया जिनको उसने अच्चा पर्शिक्ष्ण दिया हुवा था जब युद्ध होने लगा तो प्रथम राजा की सेना भागने लगी क्योकि वो उनका सामना नही कर पाए और प्रथम राजा की इस युद्ध में पराजय हो जाती है और दितीय राजा इस युद्ध का विजेता बन जाता है 
इसके बाद प्रथम राजा उस ऋषि के पास वापस जाता है और कहता है की है महात्मा आपने तो कहा था की मेरी इस युद्ध में विजय होगी लेकिन इस युद्ध में तो मेरी पराजय हो गयी है और आपने जिसके लिए कहा था की उसकी पराजय होगी उसकी तो इस युद्ध में विजय हो गयी है तो उस ऋषि ने कहा की महाराज मेने जब आपको कहा की आपके भाग्य में विजय लिखी है तो आपने युद्ध की कोई तयारी नही की और ऐसे ही चले गये लेकिन मेने जब दिद्तीय राजा को कहा की आप की पराजय होगी तो उसने उसी दिन से अपनी उस कमी को पूरा किया और अपनी मेहनत से अपनी किस्मत का लिखा ही बदल दिया

हमे भी अपनी लाइफ में किस्मत के भरोसे नही बल्कि अपनी मेहनत पर विस्वास रखना चाहिए क्योकि किस्मत तो वोही लिखती है जो हम चाहते है यहाँ पर मुझे एक कोड्स हमेशा याद रहता है –

गिरता है तो पत्थर को दोष देता है,डूबता है तो पानी को दोष देता है ,इन्सान भी कितना अजीब है करता कुछ नही और किस्मत को दोष देता है

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